यह अच्छे-बुरे लोकतंत्र का समय है: प्रो. मैनेजर पाण्डेय

[हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और विचारक प्रो. मैनेजर पाण्डेय पिछले वर्ष पचहत्तर वर्ष के हो गये। अपने जीवन की इस लंबी अवधि में वे भारत समेत पूरी दुनिया में हो रहे परिवर्तनों के साक्षी रहे हैं। खासकर, साहित्य और विचारधारा में हो रही तब्दीलियों को उन्होंने करीब से देखा और महसूस किया है। इन तमाम…

रूसी क्रांति के सौ वर्ष: प्रो मणीन्द्र नाथ ठाकुर

1917 की रूस की क्रांति का एक विषय के रूप में राजनीतिक विज्ञान पर प्रभाव तो पड़ा ही, इसने राजनीतिक व्यवस्था और विचारधारा के रूप में विश्व को एक विकल्प भी दिया। ‘रूसी क्रांति के सौ वर्ष’ विषय पर यहां प्रस्तुत है जाने-माने राजनीति शास्त्री प्रो मणीन्द्र नाथ ठाकुर (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) से बातचीत…

रूसी क्रांति के सौ वर्ष: प्रो. मैनेजर पाण्डेय

1917 में लेनिन के नेतृत्व में हुई क्रांति का एक दुनिया भर में एक व्यापक प्रभाव था। भारत के समाज, राजनीति और साहित्य को इसने व्यापक रूप से प्रभावित किया था। ‘रूसी क्रांति के सौ वर्ष’ विषय पर यहां प्रस्तुत है जाने-माने आलोचक और विचारक प्रो. मैनेजर पाण्डेय (पूर्व-प्रोफेसर, भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली)…

रूसी क्रांति के सौ वर्ष: प्रो रिज़वान क़ैसर

वर्ष 2017 में बोल्शेविकों के नेतृत्व में की गई रूसी क्रांति को सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस क्रांति ने न केवल रूस के समाज को नई दिशा दी बल्कि वैश्विक राजनीतिक को भी प्रभावित किया। सोवियत संघ ने विश्व-राजनीति में अपने आपको स्थापित किया और दुनिया के अलग-अलग देशों में सोवियत समाज के मूल्यों के प्रचार-प्रसार का…

Russia – Rise of the Phoenix: Noorjahan Momin

Recently concluded American Presidential elections have surprised us not just in terms of its results but also through the prominence it has given to Russia while dealing with questions of domestic as well as international significance. In the post-disintegration obituaries to the Soviet Union, the end of bipolar world order was a recurring theme. It…