पूछो कि पूछने से बनती है दुनिया: निरंजन सहाय

‘मूल्यांकन ने अंकन में ज़्यादा से ज़्यादा निष्पक्षता के प्रति अपने पागलपन के कारण तथा बच्चों के कोमल दिमाग को अनगिनत जानकारी के बेकार टुकड़ों (स्वेज नहर किसने बनाई ? 19 नवंबर को सूर्य कहाँ होगा ? हेयर कौन है और उसके उपकरणों के बारे में तुम क्या जानते हो ?) से भरने की अंतहीन…

शिक्षा की कसौटी: गणपत तेली

सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (जनसत्ता, 12 अप्रैल) में शिक्षा पर बात करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने ठीक ही बाजारीकरण और निजीकरण के हमले को शिक्षा-व्यवस्था के लिए खतरनाक माना है। निजीकरण और बाजारीकरण के बाद शिक्षा पाने के लिए आम छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना…