यह अच्छे-बुरे लोकतंत्र का समय है: प्रो. मैनेजर पाण्डेय

[हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और विचारक प्रो. मैनेजर पाण्डेय पिछले वर्ष पचहत्तर वर्ष के हो गये। अपने जीवन की इस लंबी अवधि में वे भारत समेत पूरी दुनिया में हो रहे परिवर्तनों के साक्षी रहे हैं। खासकर, साहित्य और विचारधारा में हो रही तब्दीलियों को उन्होंने करीब से देखा और महसूस किया है। इन तमाम…

भारत की ज्ञान परंपरा: प्रो दीपक कुमार

प्रो. दीपक कुमार ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के हिंदी एकक द्वारा आयोजित विश्व हिंदी दिवस समारोह में ‘भारत की ज्ञान परंपरा’ विषयक चौथा गुणाकर मुले स्मृति व्याख्यान दिया. प्रो. दीपक कुमार जेएनयू में इतिहास और विज्ञान के प्रोफेसर हैं। प्रस्तुत है वह व्याख्यान :    

फेसबुक और फ्री बेसिक: अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

इंटरनेट ने एक मुकम्मल बाजार के उभार की पृष्ठभूमि तैयार की है। कई अर्थों में एक व्यापक जनसमूह का इंटरनेट से जुड़ाव इस बाजार के उत्पादों के आकर्षण से ही संभव हुआ है। शुरू में यह जुड़ाव जनसंपर्क तक सीमित था, जिसमें मुख्य रूप से याहू, रेडिफ और गूगल अपने ‘जीमेल’ के साथ इस पूरे…