यह अच्छे-बुरे लोकतंत्र का समय है: प्रो. मैनेजर पाण्डेय

[हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और विचारक प्रो. मैनेजर पाण्डेय पिछले वर्ष पचहत्तर वर्ष के हो गये। अपने जीवन की इस लंबी अवधि में वे भारत समेत पूरी दुनिया में हो रहे परिवर्तनों के साक्षी रहे हैं। खासकर, साहित्य और विचारधारा में हो रही तब्दीलियों को उन्होंने करीब से देखा और महसूस किया है। इन तमाम…

साहित्य लोगों को सहिष्णु बनाता है: उदय प्रकाश

साहित्य सिर्फ कहानी नहीं कहता है, वह  लोगों को सहिष्णु और संवेदनशील बनाता है। हो सकता है कि सहिष्णु बनाने की यह  प्रक्रिया बहुत ही छोटे स्तर पर हो, और हो सकता है कि यह सिर्फ वैयक्तिक स्तर पर हो। ये विचार चर्चित लेखक उदय प्रकाश ने व्यक्त किए। वे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के…

चित्तौड़ में अखिलेश के कृतित्व पर राष्ट्रीय सेमिनार

चित्तौडगढ। जो आपके अन्दर है, यदि आप सावधान न हुए, वह नष्ट भी करता है, रूग्ण बनाता है। चाहे जिन्दगी हो या साहित्य, आप किसी आन्यंतिक छबि, विचार या उम्मीद से मोहग्रस्त रहे और जो नया आपके नजदीक आने के लिए छटपटा रहा है – उस सबको अनदेखा किया तो फिर अन्धकूप में गिरना होगा।…

साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंद

साहित्यकार का लक्ष्य केवल महफिल सजाना और मनोरंजन का सामान जुटाना नहीं है,- उसका दरजा इतना न गिराइए।… हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिंतन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की आत्मा हो, जीवन की सचाइयों का प्रकाश हो- जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाए नहीं; क्योंकि अब और ज्यादा सोना मृत्यु का लक्षण है।