جے ا ین یو پر حملہ: کس سے ڈرتے ہے وہ؟: نورجہاں مومن

پچھلے کچھ دنوں سے جواہر لال نہرو یونیورسٹی ایک تنازعے کے بیچ میں پھنسی ہوئی ہے. مرکزی سرکار کے ایما میں دہلی پولیس نے یونیورسٹی کے سٹوڈنٹ یونین کے صدر کنہیا کمار کو گرفتار کر لیا ہے.اس کے ساتھ ہی دیگر سٹوڈنٹ لیڈران کی بھی ملک مخالف ہونے اور مجرمانہ سازش کرنے کے الزام کے…

हमारी साझी संस्कृति का ताना-बाना: भीष्म साहनी

(पी.सी जोशी स्मृति व्याख्यान, 1999) एक ऐसे व्यक्ति की स्मृति में आयोजित इस व्याख्यान श्रृंखला में आमन्त्रण पाकर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, जिसने हमारे राष्ट्रीय जीवन के राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। चौथे दशक के प्रारंभिक वर्षों में ही श्री पी.सी. जोशी एक जाना-माना नाम हो…

इतनी मुलाक़ातों के बाद अजनबी: हिमांशु पंड्या

[भारत  और पाकिस्तान के संबंध हमेशा ही संवेदनशील रहे हैं और इन संबंधों में उतार-चढ़ाव दोनों देशों के अंदरूनी मसलों को भी प्रभावित करते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली हिंसक कार्यवाहियों ने हमेशा ही अंध-राष्ट्रवादियों और कट्टरपंथियों  को मौका दिया है, जबकि दूसरा तबका हमेशा शांति और संवाद का पक्षधर रहा है।…

हफ्ते की किताब: पल्लव- ‘नीलकान्त का सफ़र’

कहानी कहना मनुष्य की आदिम प्रवृत्ति है और कहानीकारों में उन्हीं लेखकों को स्मृति में स्थान मिल पाता है जो कहानी लिखने और सुनाने का भेद पाट सकें। अस्सी के दशक में नयी कहानी के बाद उठ खड़े हुए अनेक कहानी आन्दोलनों के कारण कहानी में बहुत अराजकता फ़ैल गई थी। इस दौर में जिन…

‘हमारे समय में भीष्म साहनी’ का आयोजन

  घाटशिला 14 नवम्बर, 2015. कालजयी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, रंगमंचीय कलाकार अभिनेता भीष्म साहनी के जन्म शताब्दी वर्ष 2015 में देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है. इसी कड़ी में घाटशिला प्रलेसं ने 14 नबम्वर को ताम्र नगरी मऊभण्डार स्थित आई.सी.सी. मजदूर यूनियन (घाटशिला) में “हमारे समय में भीष्म साहनी’ विषय पर परिचर्चा…

औपनिवेशिक सत्ता की भाषा नीति और हिंदी-उर्दू विवाद: गणपत तेली

शुरू में अपने अकादमिक साधनों से अंग्रेजों ने भारत को असभ्य और जड़ बताया और उसे सभ्य बनाने के कार्य का श्रेय लिया। सभ्यता के इस मिशन में उन्होंने भारत के सामाजिक क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर सुधार कार्य भी किये। ब्रिटिश शासन के इन हस्तक्षेपों का भारतीय समाज की प्रतिगामी ताकतों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध…

सौ बरस के भीष्म साहनी: पल्लव

भीष्म साहनी हिन्दी के सबसे सम्मानित कथाकारों में हैं। सम्मानित से आशय है जिन्हें पाठकों, आलोचकों और व्यापक समाज से लेखन के लिए भरपूर सम्मान और प्रेम मिला। स्वतंत्रता पूर्व रावलपिंडी में 1915 के 8 अगस्त को उनका जन्म हुआ था। उनके पिता कपडे के सामान्य व्यापारी थे और चाहते थे कि उनके दोनों बेटे भी…

शिक्षा की कसौटी: गणपत तेली

सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (जनसत्ता, 12 अप्रैल) में शिक्षा पर बात करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने ठीक ही बाजारीकरण और निजीकरण के हमले को शिक्षा-व्यवस्था के लिए खतरनाक माना है। निजीकरण और बाजारीकरण के बाद शिक्षा पाने के लिए आम छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना…