मीरां के जीवन और समाज की पड़ताल: गणपत तेली

भक्तिकालीन कविता में मीरा का नाम एक लोकप्रिय कवि के रूप में हमारे सामने आता है, लेकिन मीरा को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की कोशिशें बहुत कम हुई है। साहित्य के इतिहास ग्रंथों में तो मीरा को कोई विशेष स्थान नहीं मिला लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अकादमिक दुनिया में मीरा पर केन्द्रित कुछ महत्वपूर्ण…

मीरां लोक में बनती-बिगड़ती है: प्रो माधव हाड़ा से गणपत तेली की बातचीत

मीरां पर अपनी शोधपरक पुस्तक ‘पचरंग चोला पहन सखी री’ के लिए आलोचक माधव हाड़ा इन दिनों चर्चा में हैं। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में हिन्दी के आचार्य और विभागाध्यक्ष हाड़ा इससे पहले समकालीन कविता पर दो तथा मीडिया पर दो पुस्तकें लिख चुके हैं। उनसे मीरां के जीवन के सम्बन्ध मे बातचीत हुई। प्रस्तुत…

शिक्षा की कसौटी: गणपत तेली

सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (जनसत्ता, 12 अप्रैल) में शिक्षा पर बात करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने ठीक ही बाजारीकरण और निजीकरण के हमले को शिक्षा-व्यवस्था के लिए खतरनाक माना है। निजीकरण और बाजारीकरण के बाद शिक्षा पाने के लिए आम छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना…

रेवड़ की राहें: भँवर लाल मीणा

मैं  गांव से बस द्वारा नजदीक के बाजार में खरीदारी करने जा रहा था। मैंने देखा, बस बहुत धीरे-धीरे चल रही थी। सामने से बहुत सारी भेड़ें आ रही थीं और उसके चलते बस लगभग आधा घंटा रुकी रही, जब भेडें निकल गर्इं, तब बस आगे बढ़ी। इसके बाद मैंने देखा कि दो हजार के…