मीरां लोक में बनती-बिगड़ती है: प्रो माधव हाड़ा से गणपत तेली की बातचीत

मीरां पर अपनी शोधपरक पुस्तक ‘पचरंग चोला पहन सखी री’ के लिए आलोचक माधव हाड़ा इन दिनों चर्चा में हैं। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में हिन्दी के आचार्य और विभागाध्यक्ष हाड़ा इससे पहले समकालीन कविता पर दो तथा मीडिया पर दो पुस्तकें लिख चुके हैं। उनसे मीरां के जीवन के सम्बन्ध मे बातचीत हुई। प्रस्तुत…

घर मुबारक: जवाहरलाल नेहरू

गाड़िया लौहार राजस्थान की एक घुमक्कड़ जनजाति हैं, जिसने यह प्रण लिया था कि जब तक पराधीनता रहेगी, वे स्थायी रूप से नहीं रहेंगे। देश की आज़ादी के बाद सरकार ने उन्हें बसाने की पहल की। इसी संबंध में चित्तौड़गढ़ में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संबोधित किया था। उनके उस ऐतिहासिक भाषण के मुख्य…

मीरां का कैननाइजेशन: प्रो. माधव हाड़ा

जेम्स टॉड के इस कैननाइजेशन के दूरगामी नतीजे निकले। राजवंशों के ख्यात, बही, वंशावली आदि पारंपरिक इतिहास रूपों में लगभग बहिष्कृत मीरां को अब राज्याश्रय में लिखे जाने वाले इतिहासों में भी जगह मिलने लगी। श्यामलदास ने मेवाड़ के राज्याश्रय में 1886 ई. में लिखे गए अपने इतिहास वीर विनोद (मेवाड़ का इतिहास) में मीरां का उल्लेख बहुत सम्मानपूर्वक किया है।