मीरां के जीवन और समाज की पड़ताल: गणपत तेली

भक्तिकालीन कविता में मीरा का नाम एक लोकप्रिय कवि के रूप में हमारे सामने आता है, लेकिन मीरा को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की कोशिशें बहुत कम हुई है। साहित्य के इतिहास ग्रंथों में तो मीरा को कोई विशेष स्थान नहीं मिला लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अकादमिक दुनिया में मीरा पर केन्द्रित कुछ महत्वपूर्ण…

मीरां का कैननाइजेशन: प्रो. माधव हाड़ा

जेम्स टॉड के इस कैननाइजेशन के दूरगामी नतीजे निकले। राजवंशों के ख्यात, बही, वंशावली आदि पारंपरिक इतिहास रूपों में लगभग बहिष्कृत मीरां को अब राज्याश्रय में लिखे जाने वाले इतिहासों में भी जगह मिलने लगी। श्यामलदास ने मेवाड़ के राज्याश्रय में 1886 ई. में लिखे गए अपने इतिहास वीर विनोद (मेवाड़ का इतिहास) में मीरां का उल्लेख बहुत सम्मानपूर्वक किया है।