इतनी मुलाक़ातों के बाद अजनबी: हिमांशु पंड्या

[भारत  और पाकिस्तान के संबंध हमेशा ही संवेदनशील रहे हैं और इन संबंधों में उतार-चढ़ाव दोनों देशों के अंदरूनी मसलों को भी प्रभावित करते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली हिंसक कार्यवाहियों ने हमेशा ही अंध-राष्ट्रवादियों और कट्टरपंथियों  को मौका दिया है, जबकि दूसरा तबका हमेशा शांति और संवाद का पक्षधर रहा है।…

औपनिवेशिक सत्ता की भाषा नीति और हिंदी-उर्दू विवाद: गणपत तेली

शुरू में अपने अकादमिक साधनों से अंग्रेजों ने भारत को असभ्य और जड़ बताया और उसे सभ्य बनाने के कार्य का श्रेय लिया। सभ्यता के इस मिशन में उन्होंने भारत के सामाजिक क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर सुधार कार्य भी किये। ब्रिटिश शासन के इन हस्तक्षेपों का भारतीय समाज की प्रतिगामी ताकतों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध…

भाषा विवाद और राजनीति: गणपत तेली

सम्मेलन के संग्रहालय या पुस्तकालय में ऐतिहासिक महत्त्व की कई पुरानी पुस्तकें और पत्रिकाएं धूल खा रही हैं और नष्ट होने के कगार पर हैं। यही स्थिति नागरी प्रचारिणी सभा की भी है। किसी भी शोधार्थी के लिए उस संदर्भ सामग्री तक पहुंच पाना बहुत ही मुश्किल काम हो जाता है। इस सामग्री के संरक्षण के लिए विद्वानों ने सरकार को ज्ञापन भी दिया था, लेकिन सरकार को क्या पड़ी है, यह सब करने की। कितना अच्छा होता कि अगर सम्मेलन मुकदमे में लगाए संसाधनों का सदुपयोग अपने संग्रहालय में रखी ऐतिहासिक महत्त्व की बहुमूल्य सामग्री को संरक्षित करने में लगाता।