‘हमारे समय में भीष्म साहनी’ का आयोजन

  घाटशिला 14 नवम्बर, 2015. कालजयी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, रंगमंचीय कलाकार अभिनेता भीष्म साहनी के जन्म शताब्दी वर्ष 2015 में देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है. इसी कड़ी में घाटशिला प्रलेसं ने 14 नबम्वर को ताम्र नगरी मऊभण्डार स्थित आई.सी.सी. मजदूर यूनियन (घाटशिला) में “हमारे समय में भीष्म साहनी’ विषय पर परिचर्चा…

सौ बरस के भीष्म साहनी: पल्लव

भीष्म साहनी हिन्दी के सबसे सम्मानित कथाकारों में हैं। सम्मानित से आशय है जिन्हें पाठकों, आलोचकों और व्यापक समाज से लेखन के लिए भरपूर सम्मान और प्रेम मिला। स्वतंत्रता पूर्व रावलपिंडी में 1915 के 8 अगस्त को उनका जन्म हुआ था। उनके पिता कपडे के सामान्य व्यापारी थे और चाहते थे कि उनके दोनों बेटे भी…

साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंद

साहित्यकार का लक्ष्य केवल महफिल सजाना और मनोरंजन का सामान जुटाना नहीं है,- उसका दरजा इतना न गिराइए।… हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिंतन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की आत्मा हो, जीवन की सचाइयों का प्रकाश हो- जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाए नहीं; क्योंकि अब और ज्यादा सोना मृत्यु का लक्षण है।