नयी चुनौतियां साहित्य को सार्थक दिशा देती हैं: असग़र वजाहत

असग़र वजाहत हिन्दी के जाने माने लेखक हैं। अनेक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों और नाटकों के रचनाकार असग़र मूलत: किस्सागो हैं। बीते दिनों उनका आख्यान ‘बाक़र गंज के सैयद‘ बेहद प्रसिद्ध हुआ। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम ए, पीएच डी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च करने के बाद वे 1971 से…

अमृतलाल नागरः ग्रामीण इतिहास का राष्ट्रवादी संदर्भ-  देवेंद्र चौबे

हिंदी के जिन लेखकों के लेखन में भारतीय इतिहास लेखन के कुछ सूत्र मिलते हैं उनमें अमृतलाल नागर (17.8.1916-22.2.1990) का स्थान महत्त्वपूर्ण है। उनकी छवि एक ऐसे कथाकार के रूप में उभरकर सामने आती है जिसने भारतीय समाज के इतिहास और शहरों की संस्कृति को जातीय (राष्ट्रीय) जीवन से जोड़कर लोक समाज के इतिहास को…

दुश्चक्र में ‘ज्ञान-माता’: चमन लाल

बारह फरवरी 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की दिल्ली पुलिस की गिरफ्तारी के बाद यह विश्वविद्यालय विश्व के अकादमिक जगत में सुर्खियों में आ गया है। जनेवि के पुराने छात्र विश्व के किसी भी देश में क्यों न बसे हों, वे अपनी ‘ज्ञान-माता’ (अल्मा मेटर) की सुरक्षा…

The Tri-Colour Freedom: Himanshu Pandya

I will only talk about the most sensitive issue of slogan-poster-meeting. It shall branch out to many other questions. To begin with, I can now claim with full conviction that none of the ‘Pakistan Zindabad’ slogans were raised there. It was Zee News who shrewdly morphed ‘Bhaartiya Court Zindabad’ into ‘Pakistan Zindabad’ through tempering and…

अभिव्यक्ति की आज़ादी और संवादहीनता: मणीन्द्रनाथ ठाकुर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हालिया घटनाक्रम में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी हमारी प्रशासनिक व्यवस्था के ऐतबार से एक चौंकानेवाली घटना है. हर विश्वविद्यालय में उसकी अपनी एक प्रशासनिक इकाई (प्रॉक्टोरियल बोर्ड) होती है, जो उसके परिसर में घटनेवाली घटनाओं का संज्ञान लेती रहती है. परिसर के भीतर घटनेवाली हर घटना पर वह…

जेएनयू पर हमला : किससे डरते हैं वे?- नूरजहाँ मोमिन

पिछले कुछ दिनों से जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक विवाद के बीच में फंसा हुआ है. केंद्र सरकार की शह पर दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. इस के साथ ही कुछ अन्य छात्र नेताओं की भी देशद्रोही होने और मुजरिमाना साजिश करने के इलज़ाम के…

جے ا ین یو پر حملہ: کس سے ڈرتے ہے وہ؟: نورجہاں مومن

پچھلے کچھ دنوں سے جواہر لال نہرو یونیورسٹی ایک تنازعے کے بیچ میں پھنسی ہوئی ہے. مرکزی سرکار کے ایما میں دہلی پولیس نے یونیورسٹی کے سٹوڈنٹ یونین کے صدر کنہیا کمار کو گرفتار کر لیا ہے.اس کے ساتھ ہی دیگر سٹوڈنٹ لیڈران کی بھی ملک مخالف ہونے اور مجرمانہ سازش کرنے کے الزام کے…

तीन रंग वाली आज़ादी: हिमांशु पंड्या

पहली बात, मैं अब यह दावे से कह सकता हूँ कि ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा वहां लगाया ही नहीं गया था.यह जी टीवी था जिसने ‘भारतीय कोर्ट जिंदाबाद’ को बड़ी कुशलता से वॉइस ओवर के जरिये ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ में बदला और फिर जब उसमें एबीवीपी के लोग ही फंसने लगे तो मूल वीडियो प्रस्तुत कर…

प्रो. तुलसीराम: एक मास्टर नरेटर का स्केच- नूरजहाँ मोमिन

प्रो. तुलसीराम से मेरी मुलाक़ात एम.फिल. (जेएनयू) के पहले सेमेस्टर में उस समय हुई, जब मैंने उनका कोर्स ‘इंटरनेशनल कम्युनिस्ट मूवमेंट’ लिया था। चूंकि मेरी रुचि रूसी राजनीति में थी इसलिए मैंने उस सत्र में रूसी भाषा के अलावा प्रो. अनुराधा मित्र चिनॉय, प्रो. तुलसीराम और प्रो. अरुण मोहंती के कोर्स लिये थे। शुरुआती दिनों…

एक अधूरा साक्षात्कार: प्रो. मणीन्‍द्रनाथ ठाकुर

कवि विद्रोही का जीवन दर्शन कल शाम अचानक पता चला कि कवि ‘विद्रोही’ नहीं रहे. वैसे तो आजकल कम ही कवि विद्रोही रह गए हैं, लेकिन मैं बात कर रहा हूँ कवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की जिनका वजूद ही एक तरह का विद्रोह था; जवाहरलाल नेहरु विश्व विद्यालय के प्रांगन में लगातार बने रह कर…

साहित्य लोगों को सहिष्णु बनाता है: उदय प्रकाश

साहित्य सिर्फ कहानी नहीं कहता है, वह  लोगों को सहिष्णु और संवेदनशील बनाता है। हो सकता है कि सहिष्णु बनाने की यह  प्रक्रिया बहुत ही छोटे स्तर पर हो, और हो सकता है कि यह सिर्फ वैयक्तिक स्तर पर हो। ये विचार चर्चित लेखक उदय प्रकाश ने व्यक्त किए। वे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के…

‘अच्छा! यह जेएनयू से है!’ : प्रो. नामवर सिंह से बातचीत

जाने माने आलोचक प्रो. नामवर सिंह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमरिटस हैं। जेएनयू के भारतीय भाषा केन्द्र की संकल्पना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सैद्धांतिकी पर जोर देने वाले पाठ्यक्रमों और सतत मूल्यांकन पद्धति के साथ-साथ उनका महत्वपूर्ण योगदान हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं का एक ही केन्द्र बनाना भी है। एक ही परिवेश के…

कालेधन का कुचक्र: गणपत तेली

पिछले कुछ वर्षों से स्विस बैंकों (टैक्स हेवन) में भारत के अवैध/काले धन की जमाखोरी का मुद्दा चर्चित विषय रहा है। अलग-अलग व्यक्तियों/एजेंसियों ने विदेशी बैंकों में जमा काले धन के बारे में अलग-अलग आंकड़े दिए हैं- ग्लोबल फाइनेंसियल इंटिग्रीटी (जीएफआइ) के अनुसार 462 अरब (बिलियन) अमरीकी डॉलर (1948-2008), सीबीआइ के अनुसार 500 अरब अमरीकी…