ब्रजभाषा पाठशाला: दलपत राजपुरोहित

गुजरात के कच्छ राज्य की राजधानी भुज में 18वीं सदी के मध्य में एक स्कूल स्थापित हुआ, जिसे ‘ब्रजभाषा पाठशाला’ या ‘भुज की काव्यशाला’ कहा जाता था। इस पाठशाला के संस्थापक राव लखपत (शासनकाल 1741-61 ई.) स्वयं कवि थे और साहित्य, स्थापत्य, संगीत आदि कलाओं को संरक्षण देने वाले शासक भी।

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शिक्षा की कसौटी: गणपत तेली

सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (जनसत्ता, 12 अप्रैल) में शिक्षा पर बात करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने ठीक ही बाजारीकरण और निजीकरण के हमले को शिक्षा-व्यवस्था के लिए खतरनाक माना है। निजीकरण और बाजारीकरण के बाद शिक्षा पाने के लिए आम छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना…

भाषाई उपेक्षा और असमानता: गणपत तेली

यह सही है कि भाषा संवाद का प्रभावी माध्यम हैं लेकिन भाषाई राजनीति और विवाद-विमर्श के मुद्दों को संवाद मात्र तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। चाहे हम देश के वर्तमान भाषिक परिदृश्य को गुलामी की भाषा में परिभाषित न कर पाए फिर भी भाषाई असमानता को संवादहीनता मात्र नहीं कहा जा सकता है और सौहार्द के अभाव को ही संवाद का बाधक नहीं ठहराया जा सकता।