संभावना का व्याख्यान और ‘बनास जन’ का विमोचन

चित्तौड़गढ़ 13 अक्टूबर । कविता अपने जीवन में सत्ता से हमेशा टकराती है क्योंकि कविता ही वह विधा है जो युग बदलाव की संरचना का मार्ग प्रशस्त करती है। कविता संवेदना से ही चलती है और जीवित मनुष्यता को रेखांकित करती हैं । बिना औचित्य के कविता सामाजिक नहीं हो सकती। विख्यात कवि और आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने  संभावना…

घर मुबारक: जवाहरलाल नेहरू

गाड़िया लौहार राजस्थान की एक घुमक्कड़ जनजाति हैं, जिसने यह प्रण लिया था कि जब तक पराधीनता रहेगी, वे स्थायी रूप से नहीं रहेंगे। देश की आज़ादी के बाद सरकार ने उन्हें बसाने की पहल की। इसी संबंध में चित्तौड़गढ़ में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संबोधित किया था। उनके उस ऐतिहासिक भाषण के मुख्य…

चित्तौड़ में अखिलेश के कृतित्व पर राष्ट्रीय सेमिनार

चित्तौडगढ। जो आपके अन्दर है, यदि आप सावधान न हुए, वह नष्ट भी करता है, रूग्ण बनाता है। चाहे जिन्दगी हो या साहित्य, आप किसी आन्यंतिक छबि, विचार या उम्मीद से मोहग्रस्त रहे और जो नया आपके नजदीक आने के लिए छटपटा रहा है – उस सबको अनदेखा किया तो फिर अन्धकूप में गिरना होगा।…