समकालीन कहानी का लोकतंत्र: गणपत तेली

‘कहानी का लोकतंत्र’ समकालीन कहानी पर युवा आलोचक पल्लव की किताब है, जिसमें उन्होंने समकालीन हिन्दी कहानी के बहाने हमारे समय की एक मुकम्मल तस्वीर प्रस्तुत की है। इस किताब में पल्लव ने समकालीन कहानी में आ रही उन सभी संवेदनाओं का अध्ययन किया है, जिससे आज की कहानी का ताना-बाना बना है। इन संवेदनाओं…

‘छबीला रंगबाज का शहर’ का लोकार्पण

हमारे चरित्रहीन समय में बड़े चरित्रों का बनना बंद हो गया है इसलिए परिवेश ने अब चरित्रों का स्थान ले लिया है। ‘छबीला रंगबाज का शहर’ में ऐसे ही चरित्रहीन परिवेश की कहानियां हैं जहाँ कथाकार वास्तविक पात्रों की काल्पनिक कहानियां दिखा रहा है। सुप्रसिद्ध कथाकार स्वयं प्रकाश ने साहित्य अकादेमी सभागार युवा कथाकार प्रवीण…

नयी चुनौतियां साहित्य को सार्थक दिशा देती हैं: असग़र वजाहत

असग़र वजाहत हिन्दी के जाने माने लेखक हैं। अनेक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों और नाटकों के रचनाकार असग़र मूलत: किस्सागो हैं। बीते दिनों उनका आख्यान ‘बाक़र गंज के सैयद‘ बेहद प्रसिद्ध हुआ। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम ए, पीएच डी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च करने के बाद वे 1971 से…