औपनिवेशिक सत्ता की भाषा नीति और हिंदी-उर्दू विवाद: गणपत तेली

शुरू में अपने अकादमिक साधनों से अंग्रेजों ने भारत को असभ्य और जड़ बताया और उसे सभ्य बनाने के कार्य का श्रेय लिया। सभ्यता के इस मिशन में उन्होंने भारत के सामाजिक क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर सुधार कार्य भी किये। ब्रिटिश शासन के इन हस्तक्षेपों का भारतीय समाज की प्रतिगामी ताकतों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध…

इतिहास बोध और हिन्दी प्रदेश: गणपत तेली

: पुस्तक समीक्षा: देवीशंकर अवस्थी सम्मान (2014) से सम्मानित पुस्तक ‘भारतीय इतिहास बोध का संघर्ष और हिन्दी प्रदेश’ की (बनास जन, मार्च 2014 में प्रकाशित) समीक्षा हिन्दी क्षेत्र के बौद्धिक विकास में हिन्दी नवजागरण का प्रमुख स्थान है। हालांकि विभिन्न नये शोधों द्वारा इस नवजागरण के चरित्र पर सवाल उठाये गए हैं, लेकिन इस बात से इंकार…