मुक्तिमार्ग की खोज में: प्रेमचन्‍द गांधी

जुगनू को दिन के वक्‍़त परखने की जिद करें बच्‍चे हमारे अहद के चालाक हो गए परवीन शाकिर का यह शेर हमारे दौर के बच्‍चों की जिद ही नहीं, उनकी ख्‍वाहिशों, मासूमियत भरे सवालों और जिज्ञासाओं को बहुत खूबसूरती से बयान करता है। अब इसे चाहे आप संचार माध्‍यमों का प्रभाव कहें या कि शिक्षा…

मीडिया: कितना हकीकत, कितना अफ़साना: गणपत तेली

पुस्तक समीक्षा- सीढ़ियां चढ़ता मीडिया, माधव हाड़ा, आधार प्रकाशन, पंचकूला, हरियाणा जनसंचार या मीडिया के व्यापक इतिहास का प्रारंभ छापाखाने के अविष्कार के साथ होता है। छापाखाने के अविष्कार ने जहाँ एक तरफ छपाई का काम आसान कर दिया था, वहीं कम समय, श्रम और लागत के कारण लोक भाषाओं में भी सूचनाओं का प्रसारण…