मीरां के जीवन और समाज की पड़ताल: गणपत तेली

भक्तिकालीन कविता में मीरा का नाम एक लोकप्रिय कवि के रूप में हमारे सामने आता है, लेकिन मीरा को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की कोशिशें बहुत कम हुई है। साहित्य के इतिहास ग्रंथों में तो मीरा को कोई विशेष स्थान नहीं मिला लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अकादमिक दुनिया में मीरा पर केन्द्रित कुछ महत्वपूर्ण…

मीरां लोक में बनती-बिगड़ती है: प्रो माधव हाड़ा से गणपत तेली की बातचीत

मीरां पर अपनी शोधपरक पुस्तक ‘पचरंग चोला पहन सखी री’ के लिए आलोचक माधव हाड़ा इन दिनों चर्चा में हैं। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में हिन्दी के आचार्य और विभागाध्यक्ष हाड़ा इससे पहले समकालीन कविता पर दो तथा मीडिया पर दो पुस्तकें लिख चुके हैं। उनसे मीरां के जीवन के सम्बन्ध मे बातचीत हुई। प्रस्तुत…

मीरां का कैननाइजेशन: प्रो. माधव हाड़ा

जेम्स टॉड के इस कैननाइजेशन के दूरगामी नतीजे निकले। राजवंशों के ख्यात, बही, वंशावली आदि पारंपरिक इतिहास रूपों में लगभग बहिष्कृत मीरां को अब राज्याश्रय में लिखे जाने वाले इतिहासों में भी जगह मिलने लगी। श्यामलदास ने मेवाड़ के राज्याश्रय में 1886 ई. में लिखे गए अपने इतिहास वीर विनोद (मेवाड़ का इतिहास) में मीरां का उल्लेख बहुत सम्मानपूर्वक किया है।

रेवड़ की राहें: भँवर लाल मीणा

मैं  गांव से बस द्वारा नजदीक के बाजार में खरीदारी करने जा रहा था। मैंने देखा, बस बहुत धीरे-धीरे चल रही थी। सामने से बहुत सारी भेड़ें आ रही थीं और उसके चलते बस लगभग आधा घंटा रुकी रही, जब भेडें निकल गर्इं, तब बस आगे बढ़ी। इसके बाद मैंने देखा कि दो हजार के…