अमृतलाल नागरः ग्रामीण इतिहास का राष्ट्रवादी संदर्भ-  देवेंद्र चौबे

हिंदी के जिन लेखकों के लेखन में भारतीय इतिहास लेखन के कुछ सूत्र मिलते हैं उनमें अमृतलाल नागर (17.8.1916-22.2.1990) का स्थान महत्त्वपूर्ण है। उनकी छवि एक ऐसे कथाकार के रूप में उभरकर सामने आती है जिसने भारतीय समाज के इतिहास और शहरों की संस्कृति को जातीय (राष्ट्रीय) जीवन से जोड़कर लोक समाज के इतिहास को…

घर मुबारक: जवाहरलाल नेहरू

गाड़िया लौहार राजस्थान की एक घुमक्कड़ जनजाति हैं, जिसने यह प्रण लिया था कि जब तक पराधीनता रहेगी, वे स्थायी रूप से नहीं रहेंगे। देश की आज़ादी के बाद सरकार ने उन्हें बसाने की पहल की। इसी संबंध में चित्तौड़गढ़ में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संबोधित किया था। उनके उस ऐतिहासिक भाषण के मुख्य…

मीरां का कैननाइजेशन: प्रो. माधव हाड़ा

जेम्स टॉड के इस कैननाइजेशन के दूरगामी नतीजे निकले। राजवंशों के ख्यात, बही, वंशावली आदि पारंपरिक इतिहास रूपों में लगभग बहिष्कृत मीरां को अब राज्याश्रय में लिखे जाने वाले इतिहासों में भी जगह मिलने लगी। श्यामलदास ने मेवाड़ के राज्याश्रय में 1886 ई. में लिखे गए अपने इतिहास वीर विनोद (मेवाड़ का इतिहास) में मीरां का उल्लेख बहुत सम्मानपूर्वक किया है।