सौ बरस के भीष्म साहनी: पल्लव

भीष्म साहनी हिन्दी के सबसे सम्मानित कथाकारों में हैं। सम्मानित से आशय है जिन्हें पाठकों, आलोचकों और व्यापक समाज से लेखन के लिए भरपूर सम्मान और प्रेम मिला। स्वतंत्रता पूर्व रावलपिंडी में 1915 के 8 अगस्त को उनका जन्म हुआ था। उनके पिता कपडे के सामान्य व्यापारी थे और चाहते थे कि उनके दोनों बेटे भी…

भाषाई उपेक्षा और असमानता: गणपत तेली

यह सही है कि भाषा संवाद का प्रभावी माध्यम हैं लेकिन भाषाई राजनीति और विवाद-विमर्श के मुद्दों को संवाद मात्र तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। चाहे हम देश के वर्तमान भाषिक परिदृश्य को गुलामी की भाषा में परिभाषित न कर पाए फिर भी भाषाई असमानता को संवादहीनता मात्र नहीं कहा जा सकता है और सौहार्द के अभाव को ही संवाद का बाधक नहीं ठहराया जा सकता।