बनास जन – 10: डॉ. रेणु व्यास

एक ज़माना था जब तोपें मुक़ाबिल होने पर अख़बार निकाले जाते थे। आज़ साम्राज्यवादी तोपों से बड़ा ख़तरा नवसाम्राज्यवादी – मात्र सरकार-समर्थित नहीं, वरन् सरकारों की रीति-नीति को संचालित करने वाली संगठित कोर्पोरेटी पूँजी से है। और उतना ही बड़ा ख़तरा इस खुली लूट से जनता का ध्यान बँटाने वाली – मात्र असहिष्णु ही नहीं,…

मीडिया: कितना हकीकत, कितना अफ़साना: गणपत तेली

पुस्तक समीक्षा- सीढ़ियां चढ़ता मीडिया, माधव हाड़ा, आधार प्रकाशन, पंचकूला, हरियाणा जनसंचार या मीडिया के व्यापक इतिहास का प्रारंभ छापाखाने के अविष्कार के साथ होता है। छापाखाने के अविष्कार ने जहाँ एक तरफ छपाई का काम आसान कर दिया था, वहीं कम समय, श्रम और लागत के कारण लोक भाषाओं में भी सूचनाओं का प्रसारण…