नयी चुनौतियां साहित्य को सार्थक दिशा देती हैं: असग़र वजाहत

असग़र वजाहत हिन्दी के जाने माने लेखक हैं। अनेक महत्त्वपूर्ण उपन्यासों और नाटकों के रचनाकार असग़र मूलत: किस्सागो हैं। बीते दिनों उनका आख्यान ‘बाक़र गंज के सैयद‘ बेहद प्रसिद्ध हुआ। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम ए, पीएच डी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च करने के बाद वे 1971 से…

मुक्तिमार्ग की खोज में: प्रेमचन्‍द गांधी

जुगनू को दिन के वक्‍़त परखने की जिद करें बच्‍चे हमारे अहद के चालाक हो गए परवीन शाकिर का यह शेर हमारे दौर के बच्‍चों की जिद ही नहीं, उनकी ख्‍वाहिशों, मासूमियत भरे सवालों और जिज्ञासाओं को बहुत खूबसूरती से बयान करता है। अब इसे चाहे आप संचार माध्‍यमों का प्रभाव कहें या कि शिक्षा…

‘दुनिया को बदलने की ताकत हमेशा युवा कंधों पर ही हुआ करती है’: जयनंदन

जयनंदन का हाल ही में प्रकाशित उपन्यास ‘विघटन’ युवाओं के संघर्ष की कहानी है| युवा अपनी नई सोच और दृष्टिकोण से एक नए समाज का निर्माण कर सकते हैं लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि उनमें योग्यता, कुशलता और सही निर्णय लेने की क्षमता हों| आज के युवाओ पर केन्द्रित यह उपन्यास इन्हीं ज्वलंत…

पुस्तक मेला-2017: गतिविधियाँ

 ‘कालिया और कालिया‘ में ‘मेरी प्रिय कहानियाँ‘ का लोकार्पण कहानी लिखना एक साधना और एकाकी कला है। चाहे कितने आधुनिक साधन और संजाल आपके सामने बिछे हों, लिखना आपको अपनी नन्हीं कलम से ही है। कई कई दिन कहानी दिल दिमाग में पडी करवटें बदलती रहती हैं। अंतत: जब कहानी लिख डालने का दबाव होता है,अपने…

संभावना का व्याख्यान और ‘बनास जन’ का विमोचन

चित्तौड़गढ़ 13 अक्टूबर । कविता अपने जीवन में सत्ता से हमेशा टकराती है क्योंकि कविता ही वह विधा है जो युग बदलाव की संरचना का मार्ग प्रशस्त करती है। कविता संवेदना से ही चलती है और जीवित मनुष्यता को रेखांकित करती हैं । बिना औचित्य के कविता सामाजिक नहीं हो सकती। विख्यात कवि और आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने  संभावना…

अमृतलाल नागरः ग्रामीण इतिहास का राष्ट्रवादी संदर्भ-  देवेंद्र चौबे

हिंदी के जिन लेखकों के लेखन में भारतीय इतिहास लेखन के कुछ सूत्र मिलते हैं उनमें अमृतलाल नागर (17.8.1916-22.2.1990) का स्थान महत्त्वपूर्ण है। उनकी छवि एक ऐसे कथाकार के रूप में उभरकर सामने आती है जिसने भारतीय समाज के इतिहास और शहरों की संस्कृति को जातीय (राष्ट्रीय) जीवन से जोड़कर लोक समाज के इतिहास को…

ڈر کی سیاست اور حب الوطنی کا کھیل: نورجہاں مومن

گزشتہ دنوں میں جواہرلال نہرو یونیورسٹی کا معاملہ خاصہ طول پکڑ چکا ہے. مرکزی حکومت نے اس بینلاقوامی شہرت یافتہ تعلیمی ادارے کو بدنام کرنے کے لئے جو بدبختانہ حکمت عملی اختیار کی تھی ، اس کی پرزور  مخالفت ہوئی جس کی  گونج  ملک بھر کے تعلیمی اداروں سے لے کر دہلی کی سڑکوںتک  اور…

नयी खेती: विद्रोही

मैं किसान हूँ आसमान में धान बो रहा हूँ कुछ लोग कह रहे हैं कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता मैं कहता हूँ पगले! अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है तो आसमान में धान भी जम सकता है और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा या तो ज़मीन से…

हफ्ते की किताब: ‘श्यामलाल का अकेलापन’ – पल्लव

[पल्लव बनास जन के संपादक हैं और जाने माने कथा समीक्षक।  हमारे आग्रह पर उन्होंने तय  किया है कि हर सप्ताह अपनी पसन्द की किसी एक नयी-पुरानी किताब पर लिखेंगे। आशा है, आप पसंद करेंगे।   वे शुरुआत कर रहे हैं, संजय कुंदन के कहानी संग्रह ‘श्यामलाल का अकेलापन’ से] ‘यह डराना ही तो है। वह कहना चाहता है कि…

साम्राज्यवादी हिंदी का प्रश्न और दूसरी भाषाएँ: अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी

आम तौर पर किसी भाषा का विकास एवं विस्तार उसके समाज के साथ होता है, लेकिन हिंदी के संदर्भ में यह तथ्य शतांश सत्य नहीं है। हिंदी का विकास जिस खड़ी बोली से हो रहा था एवं इधर महात्मा गांधी जिस ‘हिंदुस्तानी’ की बात कर रहे थे, उन दोनों हिंदी के दो अलग लक्ष्य थे।…

चित्तौड़ में अखिलेश के कृतित्व पर राष्ट्रीय सेमिनार

चित्तौडगढ। जो आपके अन्दर है, यदि आप सावधान न हुए, वह नष्ट भी करता है, रूग्ण बनाता है। चाहे जिन्दगी हो या साहित्य, आप किसी आन्यंतिक छबि, विचार या उम्मीद से मोहग्रस्त रहे और जो नया आपके नजदीक आने के लिए छटपटा रहा है – उस सबको अनदेखा किया तो फिर अन्धकूप में गिरना होगा।…

The Legends of Railway in India: Ganpat Teli

Book Review: Halt Station India: The Dramatic Tale of the Nation’s First Rail Lines by Rajendra B. Aklekar, Rupa Books, Delhi, 2014. Sometimes when we travel in the trains, we usually think of how the railway made its ways in India? What was the story of the first rail line of the country? How the project…