‘छबीला रंगबाज का शहर’ का लोकार्पण

हमारे चरित्रहीन समय में बड़े चरित्रों का बनना बंद हो गया है इसलिए परिवेश ने अब चरित्रों का स्थान ले लिया है। ‘छबीला रंगबाज का शहर’ में ऐसे ही चरित्रहीन परिवेश की कहानियां हैं जहाँ कथाकार वास्तविक पात्रों की काल्पनिक कहानियां दिखा रहा है। सुप्रसिद्ध कथाकार स्वयं प्रकाश ने साहित्य अकादेमी सभागार युवा कथाकार प्रवीण…

‘खामोशी’ का लोकार्पण

कवि और सुपरिचित फिल्मकार गौहर रज़ा की सद्यप्रकाशित नज़्म पुस्तक ‘खामोशी’ का लोकार्पण शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ।पुस्तक के प्रकाशक राजपाल एंड संज द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि देश की जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने इस पुस्तक का लोकार्पण किया।इस अवसर पर हिंदी की प्रसिद्ध कवि अनामिका और प्रसिद्ध लेखक और…

आनंद कुरेशी के कहानी संग्रह ‘औरतखोर’ का लोकार्पण

डूंगरपुर। बहुत सा श्रेष्ठ साहित्य भी विभिन्न कारणों से पाठकों तक पहुँच नहीं पाता. आनंद कुरेशी जैसे कथाकार को भी व्यापक हिन्दी पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए हम सबको प्रयास करने होंगे. हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक असग़र वजाहत ने डूंगरपुर के दिवंगत लेखक आनंद कुरेशी के ताजा प्रकाशित कहानी संग्रह ‘औरतखोर’ के लोकार्पण समारोह…

बनास जन के असगर वजाहत विशेषांक का लोकार्पण

लेखक का सम्मान करना अकादमिकी का प्राथमिक कर्तव्य है। बड़े लेखक भाषाओं के दायरे में नहीं देखे जाते। असग़र वजाहत का लेखन उन्हें भारत के संदर्भ में सचमुच बड़ा लेखक बनाता है।  गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘बनास जन’ के लोकार्पण समारोह में मीडिया संकाय के अधिष्ठाता प्रो अनूप बेनिवाल ने कहा कि बहुत कम…

राष्ट्रीय अस्मिता और अंबेडकरी चिंतन: शरण कुमार लिम्बाले

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा जामिया के पहले हिंदी शिक्षक देवदास गांधी की स्मृति में नौंवा देवदास गांधी स्मृति व्याख्यान दिनांक 23.02.2016 को आयोजित किया गया। इस वर्ष यह व्याख्यान जाने-माने मराठी साहित्यकार प्रो शरण कुमार लिंबाले ने ‘राष्ट्रीय अस्मिता और अंबेडकरी चिंतन’ विषय पर अभिव्यक्त किया। यह व्याख्यान आप यहां सुन-देख…

‘रचना और रचनाकार’ विषय पर हिन्दू कालेज में गोष्ठी

  दिल्ली। हमारी जड़ें कहाँ हैं? हमारे बच्चों की जड़ें कहाँ हैं? हम बिना जड़ों के कब तक जी पाएंगे? हमारी पहचान क्या है? कहीं हम समाज के उस वंचित समूह की तरह ही तो नहीं हो गए, जिन्हें औरत कहते हैं। जो बिना जड़ों के, बिना खाद-पानी के, किसी भी जलवायु में पनपने का…

‘हस्ताक्षर’ के दस साल: रोहित शर्मा

हिन्दी अगर देश के बड़े भूभाग की भाषा है तो यह स्वाभाविक है कि अनेक प्रयोग और नवाचार इस भाषा और साहित्य में होते हों। देश की राजधानी दिल्ली में सौ साल से भी अधिक पुराने हिन्दू कालेज में ऐसे एक प्रयोग को दस साल पूरे हुए। यहाँ के हिंदी विभाग द्वारा एक हस्तलिखित पत्रिका निकाली…

साहित्य लोगों को सहिष्णु बनाता है: उदय प्रकाश

साहित्य सिर्फ कहानी नहीं कहता है, वह  लोगों को सहिष्णु और संवेदनशील बनाता है। हो सकता है कि सहिष्णु बनाने की यह  प्रक्रिया बहुत ही छोटे स्तर पर हो, और हो सकता है कि यह सिर्फ वैयक्तिक स्तर पर हो। ये विचार चर्चित लेखक उदय प्रकाश ने व्यक्त किए। वे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के…

‘हमारे समय में भीष्म साहनी’ का आयोजन

  घाटशिला 14 नवम्बर, 2015. कालजयी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, रंगमंचीय कलाकार अभिनेता भीष्म साहनी के जन्म शताब्दी वर्ष 2015 में देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है. इसी कड़ी में घाटशिला प्रलेसं ने 14 नबम्वर को ताम्र नगरी मऊभण्डार स्थित आई.सी.सी. मजदूर यूनियन (घाटशिला) में “हमारे समय में भीष्म साहनी’ विषय पर परिचर्चा…