बहरहाल–फिलहाल: कथाकार काशीनाथ सिंह की बातें – सिद्धार्थ सिंह

कथाकार काशीनाथ सिंह की बातें उनके बेटे प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह की जुबानी   बचपन से शुरुआत करता हूँ तो याद आता है कि शायद पापा से भी पहले हम दोनों भाईयों की मुलाक़ात उनके मुसुक से हुयी थी |  मुसुक यानि भुजाओं की मसल्स ; जिन्हें पंजाबी लोग डोले – शोले भी कहते हैं |…