समकालीन कहानी का लोकतंत्र: गणपत तेली

‘कहानी का लोकतंत्र’ समकालीन कहानी पर युवा आलोचक पल्लव की किताब है, जिसमें उन्होंने समकालीन हिन्दी कहानी के बहाने हमारे समय की एक मुकम्मल तस्वीर प्रस्तुत की है। इस किताब में पल्लव ने समकालीन कहानी में आ रही उन सभी संवेदनाओं का अध्ययन किया है, जिससे आज की कहानी का ताना-बाना बना है। इन संवेदनाओं…

दलित विमर्श के विभिन्न आयाम: सदानन्द वर्मा

समीक्षित पुस्तक: मुकेश मिरोठा, दलित विमर्श : दशा और दिशा, ए.आर.पब्लिशिंग कंपनी, दिल्ली, 2017 डॉ. मुकेश मिरोठा की आलोचनात्मक कृति “दलित विमर्श : दशा और दिशा” दलित लेखन और आंदोलन के विभिन्न आयामों को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि लेखक ने दलित लेखन में चली आ रही ऐतिहासिक पड़ताल के साथ-साथ दलित विमर्श की स्थिति, दलित…