बनास जन के असगर वजाहत विशेषांक का लोकार्पण

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लेखक का सम्मान करना अकादमिकी का प्राथमिक कर्तव्य है। बड़े लेखक भाषाओं के दायरे में नहीं देखे जाते। असग़र वजाहत का लेखन उन्हें भारत के संदर्भ में सचमुच बड़ा लेखक बनाता है।  गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘बनास जन’ के लोकार्पण समारोह में मीडिया संकाय के अधिष्ठाता प्रो अनूप बेनिवाल ने कहा कि बहुत कम लेखक होते हैं जिन्हें पढ़कर सचमुच जीवन भर प्रेरणा मिलती हो। असग़र वजाहत ऐसे बड़े लेखक हैं जिन्होंने भारत विभाजन पर ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ’ को मार्मिक कृति लिखकर मनुष्यता के पक्ष में एक महान कृति की रचना की है। आयोजन में मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो आशुतोष मोहन ने असग़र वजाहत के साथ अपने रंगमंच के अनुभव सुनाए और कहा कि उनके साथ रहकर ही जाना जा सकता है कि बड़ा लेखक जीवन में कितना सहज और सरल होता है। प्रो मोहन ने असग़र वजाहत के आख्यान ‘बाक़र गंज के सैयद’ को इधर लिखी गई सबसे महत्त्वपूर्ण कृति बताया। विश्वविद्यालय में रंगमंच के सलाहाकार अनूप त्रिवेदी ने ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ’ के मंचन में प्रयुक्त दो गीत सुनाए तथा हबीब तनवीर के प्रसिद्ध तराने ‘अब रहिये बैठ इस जंगल में’ की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

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आयोजन में बनास जन के सम्पादक पल्लव ने असग़र वजाहत पर विशेषांक निकालने के कारण रखते हुए कहा कि वे हमारी भाषा ही नहीं हमारी संस्कृति के भी बड़े लेखक हैं जिन्होंने चार विधाओं में प्रथम श्रेणी की रचनाएं लिखी हैं। उन्होंने कहा कि एक सच्चा लेखक असल में अपने समय और समाज से अभिन्न होता है और यह अभिन्नता उसे बेचैन बनाती है। असग़र वजाहत की बेचैनी हमारे भारतीय समाज की बेचैन आवाज़ ही तो है। अंगरेजी विभाग के प्रो विवेक सचदेव ने असग़र वजाहत के लेखन के महत्त्व पर कहा कि उनका लेखन पढ़ना भारत को सही अर्थों में जानना है। इससे पहले उदयपुर से आए प्रो प्रदीप त्रिखा, रोहतक से आए प्रो जयवीर हुड्डा, प्रो अनूप बेनिवाल, शिक्षा अधिष्ठाता प्रो संगीता चौहान, अरबिंदो कालेज के प्रो राजकुमार वर्मा सहित अतिथियों ने अंक का विधिवत लोकार्पण किया। लेखकीय वक्तव्य देते हुए असग़र वजाहत ने अपने लेखन से जुड़े विविध प्रसंग सुनाए। अंगरेजी विभाग के डॉ समी अहमद खान ने असग़र वजाहत पर इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया एक स्लाइड शो दिखाया। आयोजन में डॉ नरेश वत्स, डॉ राजीव रंजन, डॉ शुभांकु कोचर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी तथा अध्यापक उपस्थित थे।

‘बनास जन’ के उपलब्ध अंक

अंक 3 मीरां अंक – 25 /- पृष्ठ संख्या 52
अंक 5 मार्क्सवाद पर विशेषांक -25 /- पृष्ठ संख्या 64
अंक 6 – विनोद कुमार शुक्ल, चंद्रकांत देवताले और कुँवरनारायण पर विशेष 50/- पृष्ठ संख्या 224
अंक 7 वाल्मीकि अंक – 25 /- पृष्ठ संख्या 72
अंक 9 नामवर अंक -30 /- पृष्ठ संख्या 84
अंक 10 – वीरेन डंगवाल पर विशेष तथा तीन नए उपन्यासों पर विशद चर्चा 75 /- पृष्ठ संख्या 280
अंक 11 – आख्यान में अखिलेश विशेषांक -150 /- पृष्ठ संख्या 368
अंक 12 -शताब्दी प्रसंग : भीष्म साहनी 150 /- पृष्ठ संख्या 288
अंक 13 – हिंदी उपन्यास की नयी जमीन 25 /- पृष्ठ संख्या 84
अंक 14 – फिर से तमस 25 /- पृष्ठ संख्या 72
अंक 15 – संवाद : नवल किशोर 25 /- पृष्ठ संख्या 52
अंक 16 – फिर से मीरां 25 /- पृष्ठ संख्या 52
अंक 17 – हिंदी कहानी पर विशेष और गद्य का ठाठ खंड 50/- पृष्ठ संख्या 224
अंक 18 – तीसरी कसम पर विशेष ( नाट्य रूपांतर और एक लंबी कविता ) 25 /- पृष्ठ संख्या 64
अंक 19 – तुगलक: पाठ और प्रदर्शन 25 /- पृष्ठ संख्या 48
अंक 20 – पुण्य स्मरण : रामविलास शर्मा 25 /- पृष्ठ संख्या 56
अंक 21 – असग़र वजाहत अंक 150/- पृष्ठ संख्या 430 (नया)
अंक 22 – नन्द चतुर्वेदी के कविता संग्रह पर विशेषांक 25 /- पृष्ठ संख्या 48 (नया)
अंक 23 – पद्मश्री मुनि विजय स्मृति अंक 25 /- पृष्ठ संख्या 48 (नया)
अंक 24 – मनीषी विद्वान भरत सिंह उपाध्याय स्मृति अंक 25 /- पृष्ठ संख्या 48 (नया)

  • पता – Banaas Jan 393, Kanishka Appartment C & D Block Shalimar Bagh Delhi- 110088 Phone- 011-27498876

 

फोटो एवं रिपोर्ट – रोहित कुमार

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