साहित्य लोगों को सहिष्णु बनाता है: उदय प्रकाश

साहित्य सिर्फ कहानी नहीं कहता है, वह  लोगों को सहिष्णु और संवेदनशील बनाता है। हो सकता है कि सहिष्णु बनाने की यह  प्रक्रिया बहुत ही छोटे स्तर पर हो, और हो सकता है कि यह सिर्फ वैयक्तिक स्तर पर हो। ये विचार चर्चित लेखक उदय प्रकाश ने व्यक्त किए। वे जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के एल्युमनी एसोसिएशन का  तीसरा सालान व्याख्यान दे रहे थे। एल्युमनी एसोसिएशन ऑफ जेएनयू के इस आयोजन में उन्होंने साहित्य की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि साहित्य अपने समय की अर्थव्यवस्था को भी समझाता है, हांलाकि उसके समझाने का तरीका अलग होता है। उपन्यास की अवधारणा पर जोर देते हुए उदय प्रकाश ने कहा कि यूरोप में भले ही उपन्यास की अवधारणा मध्यवर्ग से जुडी हुई हो लेकिन एशियाई देशों में यह किसानी अर्थव्यवस्था को अभिव्यक्त करने वाली विधा है। उन्होंने अपने लेखन के संदर्भ से कहा कि साहित्य उन परिस्थितियों को पहचानता है, जिनमें व्यक्ति जीवनयापन करता है।

Uday Prakash JNU

Uday Prakash, Devendra Choubey, Rajesh Kumar

अपने व्याख्यान में उदय प्रकाश ने वर्तमान समय में लेखक की असुरक्षा के प्रसंग पर कहा की आज हमारी भाषा में लेखक का हिस्सा कम हो गया है। यह चिन्ताजनक स्थिति है और इसी के कारण समाज में लेखक के हालात पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता है। असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मैंने सबसे पहले पुरस्कार लौटाया था इसलिए मुझे सबसे ज़्यादा यह पूछा जाता है कि आपातकाल के दौरान मैंने क्या किया? उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौर में मैं 20-22 साल का था, अवार्ड तो था ही नहीं लेकिन आपातकाल के विरोध के कारण उन्हें सागर विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा था। अपने जेएनय़ू के दिनों को याद करते हुए उन्होंने यहाँ के अंतरानुशासनात्मक अध्ययन की प्रशंसा की और कहा कि उस समय जेएनयू में औपचारिकताएँ नहीं होती थीं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेन्द्र चौबे ने कहा की उदय प्रकाश कहानी कहने की शैली में तो अनूठे हैं ही, साथ ही, उनके कथा संसार की संवेदना इतनी व्यापक है कि समाज का कोई तबका उससे नहीं छुटता है। उन्होंने एसोसिएशन की गतिविधियों की जानकारियाँ देते हुए कहा कि जेएनयू सिर्फ डिग्री नहीं देता है, बल्कि समाज से जुड़े हुए लेखक और बौद्धिक भी देता है, उदय प्रकाश ऐसे ही लेखक और बुद्धिजीवी हैं। एसोसिएशन के उपाध्याक्ष्य राजेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उदय प्रकाश के साहित्य की प्रासंगिता पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में उदय प्रकाश जैसे लेखकों का दायित्व और महत्व बढ़ जाता है। व्याख्यान के बाद हुई परिचर्चा में मणीन्द्र नाथ ठाकुर, दुर्गाप्रसाद गुप्त, अखलाक आहन, जैनेन्द्र कुमार, प्रणव कुमार, मीता नारायण, उदय शंकर, अनीसुर रहमान सहित कई लोगों ने भाग लिया।

एल्युमनी एसोसिएशन ऑफ जेएनयू

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