घर मुबारक: जवाहरलाल नेहरू

गाड़िया लौहार राजस्थान की एक घुमक्कड़ जनजाति हैं, जिसने यह प्रण लिया था कि जब तक पराधीनता रहेगी, वे स्थायी रूप से नहीं रहेंगे। देश की आज़ादी के बाद सरकार ने उन्हें बसाने की पहल की। इसी संबंध में चित्तौड़गढ़ में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें संबोधित किया था। उनके उस ऐतिहासिक भाषण के मुख्य अंश  यहाँ प्रस्तुत है।

सबसे पहले मैं इन गाड़िया लौहार भाइयों को बधाई देता हूँ। धन्य है कि चार सौ वर्ष पहिले आपने जो प्रतिज्ञा की थी उसे पूरा करने आप पधारे। घर आज आप सबको मुबारक। आप वर्षों तक भूले भटके फिरे, कभी कभी भूले भटके फिरना अच्छा होता है। मुझे भी भटकने का शौक है लेकिन रहने के लिये कोई एक घर, कोई एक ठिकाना होना चाहिये। बहुत दिनों तक हमारा मुल्क भी एक माने में बेजान रहा। जिस पर दूसरों का अधिकार हो वह पराया हो जाता है। जब तक हमारे यहां दूसरों का राज्य था हम अपने घर में भी बेघर थे। जब स्वराज्य मिला हम भी अपने घर आये। आपने आजादी की प्रतिज्ञा की थी। लेकिन प्रतिज्ञा तो सारे देश ने भी आजादी के लिए की थी। उसके लिये जनता ने त्याग किया, बलिदान किया, मुसीबतें झेलीं और आखिर स्वराज्य हासिल किया।

हमें आजाद हुए, सात साल हुए एक काम पूरा हुआ और हम लोग चित्तौड़ आये। आप पहली बार आये और इत्तफाक की बात है कि मैं भी आज पहली बार यहां आया। मैं देश में बहुत घूमा हूँ, बचपन में ही मैं मेवाड़ और चित्तौड़ की कहानियां पढ़ता था और दिल पर उसका अजीबोगरीब असर पड़ता था। क्योंकि महाराणा ने अपने सन्देश में कहा है कि यहां के पहाड़ों के एक एक पत्थर और एक एक जर्रे में आजादी की कहानी भरी पड़ी है। लेकिन आश्चर्य है कि मैं अभी तक न आ सका और आज पहली बार आया और ऐसे सुअवसर पर आया जब आप भी आये।

महाराणा प्रताप मेवाड़ वंश के वीर पुत्र थे और उन्होंने सम्राट अकबर के सामने घुटने टेकने से इन्कार कर दिया। हमारे इतिहास की ऐसी घटनाएं हमेशा भारत के हृदय में प्रतिष्ठापित रहेंगी। किन्तु साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि अकबर जिसका बाबा बाहर से आया था स्वयं भारतीय नागरिक बन गया। भारत के इतिहास में अकबर का नाम हमेशा स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा क्योंकि उसने भारत को अपना घर बनाया और वह यहीं का रहने वाला बन गया। अकबर का सबसे बड़ा कार्य यह था कि उसने भारत और उसके लोगों को एक बनाने का तथा उनमें एकता की भावना लाने का अथक प्रयत्न किया। अकबर ने यह पाठ पढ़ाया कि सब जातियों व धर्मों को साथ साथ रहना चाहिये और भारत को अपनी मातृभूमि समझना चाहिये। हमारे हृदयों में महाराणा प्रताप के लिये सम्माननीय स्थान है और रहेगा। किन्तु अकबर का स्थान भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं रहेगा।

कई कारणों से आज का दिन शुभ है। छत्तीस बरस हुए जब आज के दिन महात्माजी ने स्वराज्य हासिल करने के लिये सत्याग्रह का एक बड़ा आन्दोलन शुरू किया था। इस दिन देश में प्रतिज्ञा की थी और एक बहुत बड़ा कार्य शुरू किया था जब से हम इसे राष्ट्रीय सप्ताह कहते हैं, और हर साल मनाते हैं। इस दिन हमने जो प्रतिज्ञा की थी, बहुत बलिदान के बाद वह पूरी हुई और हमारा देश आजाद हुआ। देश की जनता आजाद हुई।

jn1आजादी हासिल करना तो एक काम था। उसके पूरा होने पर अब जनता की उन्नति कैसे हो, यह मुल्क आगे कैसे बढ़े, यह काम सामने आया। आज इस में बैठ कर उन पर आपके सामने कुछ चर्चा करना चाहता हूं। आज पूर्णिमा है उसकी चाँदनी है। इसमें बहुत सी बातें आंखों के सामने आती हैं, हजारों बरस से ऊंच-नीच हुई हम लोगों में, कभी बड़े अच्छे दिन आये जिनमें हमारा मुल्क बहुत ऊंचा उठा और दुनियां की नजर उसकी तरफ लगी। कभी बुरे दिन आये जिनमें हम बहुत नीचे गिरे। सब देशों के इतिहास में ऐसा होता है।

आजादी के बाद भारत का नया इतिहास शुरू हुआ। देश, आप और हम सब लोग उसके लिखने वाले हैं। पिछले कुछ वर्षों में हम कुछ लोगों ने लिखा था, अब सब लोगों को लिखना है। यह बहुत बड़ा काम है आपको ऐसा इतिहास लिखना है जिससे आगे आने वाले सबक लें और याद करें। भारत के मन में जो बातें गूंजती रही हैं उन्हें हम असलियत दें, असली जामा पहिनावें।

अंग्रेजी राज्य जब तक हमारे यहां रहा, हमने उसका विरोध किया और हम आजाद हुए लेकिन उसमें हमें कोई द्वेष नहीं था। हमारे हक का सवाल था वह पूरा हो जाने पर अब अंग्रेजों से हमारी मित्राता है। हम चाहते हैं कि हमारे मामलों में कोई दूसरा दखल न दे। वे अपने देश में खुश रहें, हम अपने देश में खुश रहें, पहले भी हमारे देश में बहुत से लोग आये, तरह तरह के विचार आये।

आप ऊंचे दिमाग से काम करके ऊंचे उठें। स्वराज्य लेना तो एक छोटा कदम था बड़े काम तो अब आगे करने हैं। आजकल दुनिया में भारत का कुछ नाम है, इसलिये कि हम दुनिया में शान्ति चाहते हैं, किसी पर हमला नहीं करना चाहते, किसी के गुलाम नहीं बनना चाहते। आज के भारत में पहला धर्म है भारत की सेवा करना। यदि आप इसको भूल गये तो भारत एक छोटा देश हो जाएगा। देश गिनती से बड़ा नहीं होता। यदि हम देश को बड़ा बनाना चाहते हैं तो जो सबक हमारे बड़े नेता महात्मा गांधी ने हमें दिया उसे सदा याद रखें। अकेला राजस्थान का कोई गांव, या शहर, नहीं सारा देश आपका और मेरा प्रदेश है। इसको हमें सामने रखना है, देश के एक एक बच्चे को तरक्की करने का मौका मिले, ऐसी कोशिश करनी है। यह बहुत बड़ा काम है, जितनी तेजी से चलेंगे उतना ही नाम होगा। हमने मुल्क की तरक्की के लिये तरह तरह की योजनाएं बनाईं, नक्शे बनाये, पंचवर्षीय योजना बनाई, सो सोच-सोच कर बनाई, डरते-डरते बनाई ऐसी लम्बी चौड़ी बातें न करें जो पूरी न कर सकें, इसका ख्याल रखा, फिसल न पड़ें, मन में यह डर रहा।

धीमे-धीमे चलकर हमारे पैर जमे, हमारी जनता का हमारा आत्मविश्वास बढ़ा। हमारे यहां गल्ले की बहुत कमी थी, हमने सबसे पहिले उस पर जोर लगाया और कमी को पूरा किया। फिर बड़े काम उठाये, बांध बनाये, नहरें निकाली और बिजली पैदा करने के साधन जुटाये, क्योंकि आजकल बिजली की भी बड़ी जरूरत है। तीन बरसों में बहुत सी बातें पूरी हो गईं, इसमें हमें आत्मविश्वास बढ़ा। जनता में विश्वास बढ़ा, क्योंकि जो काम हुआ वह भारत सरकार ने नहीं, जनता ने पूरा किया। हां सरकारी लोगों ने सहायता जरूर दी, असली ताकत अपनी शक्ति में, भरोसा होने में हैं। लोग बड़े बड़े हथियार बनाते हैं, एटम बम बनाते हैं, फिर भी वे एक दूसरे से डरते हैं। लेकिन हमारे देश में कोई डर नहीं है हमें महात्माजी ने यही सबक सिखाया था कि हम किसी से डरें नहीं। हमने एक बहुत बड़े साम्राज्य का मुकाबला किया था, बगैर हथियार के निडर होकर हमने कहा हम जेल जायेंगे, लाठी खायेंगे, जब हमें कोई काम पूरा करना है तो उसमें डर किस बात का। हाय हाय क्या करना? जब इस तरह डर निकल गया तो हमारी ताकत बढ़ गई और हमने आजादी हासिल कर ली तो इस तरह हथियार नहीं अपने आप में भरोसा रखने में है।

jawaharlal-nehruमैं विश्वास के साथ घोषणा करता हूं कि भारतीय जनता का भविष्य महान है। मैं आपको भविष्य के बारे में क्या बताऊं, मैं ज्योतिषी नहीं हूँ ज्योतिषियों को मैं पसन्द भी नहीं करता। जो उनके पास जाते हैं वह अपने को भ्रम में डालते हैं और दूसरों के सामने बुरी मिसाल पेश करते हैं। इसलिए आपको ज्योतिषियों के पास नहीं जाना चाहिये। चाहे वे ठीक भविष्यवाणी करें अथवा गलत उनके पास जाना एकदम गलत ही है। मैं चाहता हूं कि आप अपने में विश्वास रखें और बाहुबल पर निर्भर रहें, न कि भाग्य या ग्रहों पर। यह ज्योतिष का क्या तमाशा है। आपने और हमने बलिदान व संघर्ष से देश को आजाद बनाया, ग्रहों व भाग्य ने नहीं बनाया।

मैं चालीस वर्ष से भारत की जनता में काम करता हूं, मैंने उसे कुछ पहचाना उतना ही मेरा उस पर भरोसा बढ़ा है। मैं कहूंगा कि उसके अन्दर शक्ति है, उठने का दम है, हौंसला है। इसलिये मेरा विश्वास है कि देश ऊंचा उठेगा, लेकिन देश को बेहोश भी न हो जाना है। हम बहुत ऊंचे हो गये अब हमें कुछ करना नहीं है जो ऐसा सोचते हैं वे गिर जाते हैं। इसीलिये भारत गिरा था, जाति भेद बहुत बढ़ गये थे। सब अपने ही अपने बारे में सोचते थे। दूसरे हम समझते थे हम बहुत ऊंचे हैं, हम ब्राह्मण हैं, क्षत्रिय हैं – दूसरे हमसे नीचे हैं इस तरह सोचने से हम कमजोर हो गये। हमारे देश में बड़े बड़े लोग हुए हैं। हमारा इतिहास उनके कारनामों से रोशन हुआ। लेकिन हमारा इतिहास यही बताता है कि हममें फूट थी, हम दूसरों को मूर्ख समझते थे, जो मूर्ख समझता है वह खुद जाहिल होता है।

हमारे देश के लोग दूर-दूर गये थे, अपना एक सन्देश लेकर, अपनी कलाएं लेकर अपनी संस्कृति लेकर। मैं पिछले दिनों हिन्द चीन गया, वहां देखा कि अपने देश की कितनी सुन्दर सुन्दर यादगारें वहां मौजूद हैं। उस समय हममें जाति भेद नहीं था, इतिहास यह नहीं बताता कि हमने किसी देश पर फौजी हमला किया। हमारा हमला कला का, बौद्ध धर्म का, संस्कृति का हमला था। उसके बाद आपका धर्म तो सिर्फ खाने पीने का रह गया। किसके साथ खाएं, किसके साथ न खाएं भारत के बाहर जाएं तो जाति से निकाल दें। कहां तो पहले भारत से इतनी दूर गये, कहां कुएं के मेंढक बन गए। अब एक नया युग शुरु हुआ। हमें बहुत बड़े काम करने हैं। पूर्णिमा का चाँद हमारे ऊपर है और हम इस किले में बैठे हैं हमारी प्रतिज्ञाएं पूरी हो गईं।

स्त्रियों को खास तौर पर कहना चाहता हूं कि आगे वे आयें। बाहर के देशों की औरत को देखिये। इसमें शक नहीं कि भारत की स्त्रियों का मुकाबला आसानी से नहीं किया जा सकता। लेकिन यह भी मेरा विचार है कि भारत के लोगों ने स्त्रियों के साथ पूरा इन्साफ नहीं किया, और स्त्रियां करती हैं वह भी वैसा न करें।

6.4.1955

(बनास जन)

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